Friday, November 29, 2019

उम्र का भरम


उम्र का भरम

ये भरम है ज़माने का,
कि उम्र बढ़ने पर बातें कम समझ आती हैं.
असल में यही तो वो वक्त है,
जब आपकी बातें ही ग़ज़ब ढाती है.

मोहब्बत, इबादत, अदावत, खिलाफत,
इस उम्र तक तज़ुर्बे का भंडार हो जाती हैं.
कायदे से यही वो उम्र है, जब,
तस्वीर की बारीकी ठीक से नज़र आती है.

तो मायूस न हो मन,
उम्र तो फ़कत एक आंकड़ा है.
इस उम्र में आकर ही, असल में तुम्हें,
आज की पीढ़ी का सही मुस्तकबिल नज़र आता है.

© सुशील मिश्र
       29/11/2019

Saturday, September 7, 2019

चाँद


चाँद

कहीं सुना है, कि चाँद यूँ हीं झट से,
किसी के आगोश में आता है,
अरे ये चाँद है, इसके अपने जलवे हैं,
अब ये कुछ नखरे तो दिखाता है.

इसकी अपनी एक ख़ास तासीर है,
जो की इसे सच में चाँद बनाता है,
और यही एक बात है,
की ये सबको लुभाता है.

कोई बात नहीं, नज़दीक तो पहुँच ही गए हैं,
उससे अपना राब्ता तो कायम हो ही गया है,
अब पहली बार झटका दिया तो दिया,
कशिश तो उसके दिल में भी, कायम कर ही दिया है.

अब तक तो उसे हमारी भी काबिलियत का,
ठीक ठाक अंदाजा लग ही गया होगा,
अब तड़पने की बारी उसकी है,
उसे हमारी मोहब्बत का अंदाजा लग ही गया होगा.

फिर लौटेंगे उसी जूनून के साथ,
उसी शिद्दत के साथ, उसी मोहब्बत के साथ,
इस दौरान वो चाँद भी तड़पेगा, हमारी राह देखेगा,
और जब मिलेंगे तो पूरी शिद्दत के साथ आगोश में लेगा.

© सुशील मिश्र
   07/09/2019